मन-दर्पण

लिखने इबारत इस मन-दर्पण की..लो उन्मुक्त हो चली अभिव्यक्ति मेरे अंतर्मन की ..

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शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"


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तब ज़िन्दगी मुस्कुराती थी..

Posted On: 13 Sep, 2014  
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Celebrity Writer Junction Forum कविता में

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तेरा ही एक हिस्सा हूँ मै!

Posted On: 1 Jul, 2014  
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ठोकरों ने संभलकर चलना सिखा दिया..

Posted On: 23 Jun, 2014  
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जब जड़ नहीं तो वृक्ष कैसा!

Posted On: 5 Jun, 2014  
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बूढ़ा-सजर..

Posted On: 4 Jun, 2014  
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शायद फिर कोई बस्ती है बसने वाली यहाँ!

Posted On: 24 May, 2014  
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माँ तो बस माँ जैसी होती है!

Posted On: 9 May, 2014  
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बेटियाँ

Posted On: 23 Apr, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

आदरणीया शिल्पा जी, सादर अभिवादन! वैसे तो मैं देख रहा हूँ की आप लिखती बहुत ही अच्छा हैं, पर प्रतिक्रियाओं का जवाब नहीं देती हैं. फिर भी एक प्रश्न बड़ी विनम्रता से कर रहा हूँ. आपके सारे उदहारण और तर्क सही हैं. पुरुष की मानसिकता भी स्त्रियों के प्रति भद्दी और गंदी है, पर एक चीज मैं कहना चाहता हूँ कि फिल्मों, विज्ञापनों जिसकी चरचा आपने कि है उनमे क्या स्त्री/अभिनेत्री कि सहमति नहीं होती है? गीतिक, मधुलिका, सुनंदा पुष्कर, अनुराधा उर्फ़ फिजा आदि नाम हैं जो उनकी सहमति और कुपरिणाम को दर्शाते हैं ..मेरा कहने का तात्पर्य है हल महिलाओं को ही ढूंढना होगा ...राजनीति में अनेक सक्षम महिलाएं हैं ...महिला आयोग है, ये सब क्या कर रही हैं.??? न्याय ब्यवस्था से तो आशा कारन ही बेकार है क्योंकि कानून अँधा होता है और किसी के बताये रस्ते पर मंद गति से चलता है......सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

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के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

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