मन-दर्पण

लिखने इबारत इस मन-दर्पण की..लो उन्मुक्त हो चली अभिव्यक्ति मेरे अंतर्मन की ..

19 Posts

156 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 17510 postid : 784114

तब ज़िन्दगी मुस्कुराती थी..

Posted On: 13 Sep, 2014 कविता,Junction Forum,Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

थामे माँ की ऊँगली जब
नन्हे-नन्हे कदम बढ़ाती थी
सवारी बाबा के काँधे की जब
रंग-बिरंगे मेले दिखलाती थी
तब जिन्दगी मुस्कुराती थी

लौटूं पढ़कर पाठशाला से जब
और हाथो से अपने माँ खाना  खिलाती थी
संग बैठ बाबा के किताबो की पहेलियाँ जब
पल भर में हल हो जाती थी
तब जिंदगी मुस्कुराती थी

करती हंसी-ठिठोली शामे जब
दोस्तों की महफ़िलों में गुजर जाती थी
दूर देश की परियाँ नानी की कहानियों में जब
मिलने हमसे आती थी
तब जिंदगी मुस्कुराती थी

दिन-भर की भाग-दौड़ से थक रख सर माँ की गोद में जब
सुनती लोरियाँ बेफिक्र पल-भर में सो जाती थी

तब जिंदगी मुस्कुराती थी

तब ज़िन्दगी मुस्कुराती थी ..

शिल्पा भारतीय “अभिव्यक्ति”



Tags:               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

5 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
September 15, 2014

लौटूं पढ़कर पाठशाला से जब और हाथो से अपने माँ खाना खिलाती थी संग बैठ बाबा के किताबो की पहेलियाँ जब पल भर में हल हो जाती थी ! आदरणीया शिल्पा भारतीय जी ! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता ! पढ़कर बहुत अच्छा लगा ! इतनी उत्कृष्ट और भावपूर्ण रचना के सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई !

Shobha के द्वारा
September 16, 2014

प्रिय शिल्पा बहुत ही कोमल भावों वाली कविता अति सुंदर ऐसे ही लिखती रहें यही आशीर्वाद हैं डॉ शोभा

yamunapathak के द्वारा
September 18, 2014

एक प्यारी सी कविता के लिए बहुत सा प्यार शिल्पा जी

sadguruji के द्वारा
January 3, 2015

आदरणीया शिल्पा भारतीय जी ! नव वर्ष 2015 की बहुत बहुत बधाई ! आपके और आपके समस्त परिवार के लिए नव वर्ष मंगलमय हो !

Cherilynn के द्वारा
October 17, 2016

Chataiisn,Thrnks for pointing out . That is preferable to my own constant. I thought I had used or seen a constant like this before (it was that I was thinking of), but was too lazy to track it down and add it. Thanks for pointing it out.Dustin


topic of the week



latest from jagran